कान्होपात्रा दत्तात्रेय किणीकर
संत कवयित्री
कान्होपात्रा याच्याशी गल्लत करू नका.
कान्होपात्रा किणीकर (२ ऑक्टोबर, इ.स. १९३४ - २५ ऑक्टोबर, इ.स. २००९) या विख्यात मराठी नाट्य अभिनेत्री होत्या. त्या कान्होपात्रा याच नावाने नाटकांत भूमिका करीत.
कारकीर्द
नाटके
| नाटक | भूमिका |
|---|---|
| आठवा अवतार | कृष्ण |
| उद्याचा संसार | ? |
| एकच प्याला | सिंधू |
| कट्यार काळजात घुसली | पंडिताची मुलगी |
| गोकुळचा चोर | कृष्ण, राधा |
| घराबाहेर | ऊर्मिला |
| चमकला ध्रुवाचा तारा | सुनीती |
| जग काय म्हणेल | ? |
| पुण्यप्रभाव | वसुंधरा |
| पैसाच पैसा | शकुंतला |
| प्रेमसंन्यास | लीला |
| प्रीतिसंगम | ? |
| बेबंदशाही | चंद्रावळ |
| भावबंधन | लतिका |
| मदनाची मंजिरी | मंजिरी, लीलावती |
| मानापमान | कुसुम, भामिनी |
| मृच्छकटिक | वसंतसेना |
| ययाती आणि देवयानी | शर्मिष्ठा |
| राजसंन्यास | शिवांगी |
| राणीचा बाग | ऊर्मिला |
| लग्नाची बेडी | अरुणा, यामिनी |
| विद्याहरण | देवयानी |
| शाकुंतल | ? |
| शारदा | वल्लरी |
| संत नामदेव | जनाबाई |
| संशयकल्लोळ | रेवती |
| सुवर्णतुला | सत्यभामा |
| सौभद्र | सुभद्रा |
| हे बंध रेशमाचे | रेशमा |
प्रसिद्ध नाट्यगीते (नाटक)
- तिमिरातुनी तेजाकडे (ययाती आणि देवयानी)
- तुझ्या यशाचा हा पुनवचांद (ययाती आणि देवयानी)
- त्या मदनमनोरमरूपी (मृच्छकटिक)
- फुलला मनी वसंत बहार (सुवर्णतुला)
- दीपा तू जळत रहा (ययाती आणि देवयानी)
पुरस्कार
मराठी नाट्यसृष्टीतील बहारदार कामगिरीसाठी कान्होपात्रा यांना "नाट्याचार्य गोविंद बल्लाळ देवल" पुरस्काराने गौरवण्यात आले होते.