मन्ना डे
| प्रबोध चंद्र डे | |
|---|---|
मन्ना डे | |
| टोपणनावे | मन्ना डे |
| आयुष्य | |
| जन्म | १ मे, इ.स. १९१९ |
| जन्म स्थान | भारत |
| मृत्यू | २४ ऑक्टोबर, इ.स. २०१३ |
| मृत्यू स्थान | बंगळूर, कर्नाटक |
| व्यक्तिगत माहिती | |
| धर्म | हिंदू |
| नागरिकत्व | भारतीय |
| देश | |
| भाषा | हिंदी भाषा |
| पारिवारिक माहिती | |
| आई | महामाया |
| वडील | पूर्ण चंद्र डे |
| संगीत साधना | |
| गायन प्रकार | गायन |
| संगीत कारकीर्द | |
| कार्य | मुंबई चित्रपटसृष्टीतील हिंदी गीते व संगीत |
| पेशा | गायन, सन १९४३,(तमन्ना चित्रपटाद्वारे) |
| गौरव | |
| पुरस्कार | पद्मश्री, पद्मभूषण, दादासाहेब फाळके पुरस्कार(सन-२००७ चा) |
मन्ना डे (मे १, इ.स. १९१९ - ऑक्टोबर २४, इ.स. २०१३:बंगळूर, कर्नाटक, भारत) हे हिंदी चित्रपटसृष्टीतील पार्श्वगायक व संगीतकार होते. त्यांना सन २००७चा दादासाहेब फाळके पुरस्कार सप्टेंबर २००९ मध्ये जाहीर करण्यात आला आणि तो २१ ऑक्टोबर २००९ला प्रदान केला गेला.
प्रसिद्ध गाणी
- एक चतुर नार करके सिंगार....(चित्रपट : पडोसन)
- ए मेरे प्यारे वतन....(चित्रपट : काबुलीवाला)
- ओ मेरी जोहर जबीं तुझे मालूम नही....(चित्रपट : वक्त)
- कसमें वादे प्यार वफा सब......(चित्रपट : उपकार)
- कौन आया मेरे मनके द्वारे....(चित्रपट : देख कबीरा रोया)
- चलत मुसाफिर मोह लिया रे....(चित्रपट : तीसरी कसम)
- जिंदगी कैसी है पहेली......(चित्रपट : आनंद)
- तुम गगन के चंद्रमा हो... (चित्रपट : ती सावित्री)
- तू प्यारका सागर है....(चित्रपट : सीमा)
- लागा चुनरी में दाग मिटाऊॅं....(चित्रपट : दिल ही तो है)
मराठी
मराठी भाषेमध्ये मन्ना डे यांनी गाणी गायली आहेत. त्यातले -घन घन माला नभी दाटल्या कोसळती धारा- हे ‘वरदक्षिणा’ चित्रपटातील ग.दि. माडगूळकर यांचे गीत आणि वसंत पवार यांचे संगीत असलेले हे गाणे विशेष लोकप्रिय आहे. इतर गाणी पुढील प्रमाणे:
- धुंद आज डोळे, हवा धुंद झाली
- अ आ आई, म म मका, मी तुझा मामा, दे मला मुका
- गोपाला गोपाला, देवकीनंदन गोपाला
- आधी रचिली पंढरी
- आम्ही जातो आमुच्या गावा
- चला पंढरीसी जाऊ
- जय जय हो महाराष्ट्राचा
- नंबर फिफ्टी फोर, हाऊस इज बांबू डोअर
- मी धुंद, तू धुंद यामिनी
- घन घन माला नभी दाटल्या
डॉ. श्रीराम लागू यांना त्यांचा आवाज मिळाला होता.